Thursday, March 7, 2013


श्री माँ भरका देवी शाक्तिपीठ

माँ भरका देवी शाक्तिपीठ धाम-भरक, भीलवाडा से लगभग ५०  कि.मी की दुरी पर स्थीत सहाडा  तहसील के  भरक पंचायत में  माँ भरका देवी शाक्तिपीठ स्थीत है।  माँ भरका देवी शाक्तिपीठ 5 ०० मीटर ऊपर पहाड़ी पर बना  हुआ है।

श्री भरका देवी शक्तिपीठ पहाड़ी पर बसा बहुत ही रमणीय स्थान है. यहाँ हर वर्ष नवरात्रा मे भजन संध्या का प्रोग्राम रहता है।जिसमे दूर-दराज से यात्री लोग दर्शंन  के लिए  आते है तथा संध्या प्रोग्राम का लुप्त उठाते है. पुराने इतिहास के अनुसार माँ भरका देवी शक्तिपीठ  5 2  शक्तिपीठो मे एक शक्तिपीठ माना जाता है.  भरका देवी शक्तिपीठ  द्वारा हर रविवार को माँ का दरबार सजाया जाता है. रविवार को मैया की तीन टाइम सेवा होती है। जो क्रमश सुबह, दोपहर और शाम को संपन्न होती है. धीरे-धीरे समय गुजरता गया माँ के दरबार में यात्रियों की भीड़ दर्शन के लिए आने लगी।पहले केवल पाँच से दस आदमी मैया के वहा  ठहर सकते थे पर,आज मैया जी के आशीर्वाद से अभी हाल ही में भव्य मंदिर का निर्माण हुआ तथा यात्रिओ के ठहरने  के लिए बड़ी विश्राम शालाओ का निर्माण किया गया।जिसमे बारिश के समय लगभग ३००० हज़ार लोगो आराम से बैठने की सुविधा है।तथा निचे गाँव में भी विश्राम शालाओ तथा पीने के पानी की टंकियो को निर्माण स्थानीय ग्राम पंचायत  द्वारा  करवाया  गया  गया।
                             
                             राजा भरतहरी की गुफा
प्राचीन मान्यता के अनुसार प्रतापी राजा भरतहरी ने  इस शक्तिपीठ पर आकर  साधना की थी। और कहा जाता है की राजा  भरतहरी ने भरक गाँव के निवासियो तथा माँ भरका देवी शक्तिपीठ के आने वाले यात्री लोगो को शेर के आंतक से मुक्ति दीलाई थी। जो आज भी वो शेर की गुफ्फ़ा है।लोगो ने ये सुना तो मैया जी के दर्शन तथा उस वीर ओजस्वी साधक को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।जिस से दूर-दराज के लोगो का यहाँ धीरे धीरे आना जाना होने लगा। और राजा भरतहरी ने फिर एकांत के लिए यहे स्थान छोड़ दूर चले गए जो आज भरतपुर के सरिस्का अभियारण में राजा भरतहरी की समाधि स्थल है.

                           श्री भरका देवी गोशाला

श्री भरका देवी शक्तिपीठ द्वारा सन २००२ में माँ भरका देवी  के आशीर्वाद से इस गोशाला का उदघाटन किया गया।आज लगभग २००० हज़ार से ३०००  गायो का पालन पोषण होता है . भरका देवी गोशाला द्वारा गायो के मल-मूत्र को  एकता कर ओषधि व जविक खाद का बनाया जाता है. तथा उचित रेट पर बिक्री की जाती है। ओषधि व जविक खाद  के रुपयों से गायो के खाने का प्रबन्ध  किया जाता है।  अनके दान-दाताओ द्वारा  गोशाला मे  गायो  की देखभाल तथा घास का पर्बंध करवाते है और राशी स्वरुप दान भी भेट करते है.   बाहर से आने वाले  लोगो  को  गाय ले जाने के लिए    प्रति  गाय ५०१/- रु की  रसीद  राशी  ली जाती है। 
श्री भरका देवी शक्तिपीठ
                                                                                                                                                                             भरक